आधी आधी रात तक सड़कों के चक्कर काटिए शा'इरी भी इक सज़ा है ज़िंदगी भर काटिए कोई तो हो जिस से उस ज़ालिम की बातें कीजिए चौदहवीं का चाँद हो तो रात छत पर काटिए
Create Imageआधी आधी रात तक सड़कों के चक्कर काटिए शा'इरी भी इक सज़ा है ज़िंदगी भर काटिए कोई तो हो जिस से उस ज़ालिम की बातें कीजिए चौदहवीं का चाँद हो तो रात छत पर काटिए
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