Kuch Alfaaz

आधी आधी रात तक सड़कों के चक्कर काटिए शा'इरी भी इक सज़ा है ज़िंदगी भर काटिए कोई तो हो जिस से उस ज़ालिम की बातें कीजिए चौदहवीं का चाँद हो तो रात छत पर काटिए

Nisar Nasik
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