आदमी जैसी किसी शय से मुलाक़ात हुई कल मेरी ख़ुद से बड़ी देर तलक बात हुई दिन यूँँ ही क़ैद रहा उस की ज़री ज़ुल्फ़ों में उस ने जब खोल दी ज़ुल्फ़ें तो कहीं रात हुई
Create Imageआदमी जैसी किसी शय से मुलाक़ात हुई कल मेरी ख़ुद से बड़ी देर तलक बात हुई दिन यूँँ ही क़ैद रहा उस की ज़री ज़ुल्फ़ों में उस ने जब खोल दी ज़ुल्फ़ें तो कहीं रात हुई
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