Kuch Alfaaz

आदमिय्यत के तक़ाज़ात निभा सकता हूँ तेरी कश्ती को मैं साहिल से लगा सकता हूँ मैं ने समझा है तुझे अपना वजूद-ए-सानी कैसे मेआ'र तेरा दिल से गिरा सकता हूँ

ALI ZUHRI
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