Kuch Alfaaz

आज हम को ख़त्म कर देगी तेरी नाराज़गी यार इतनी बे-सबब अच्छी नहीं नाराज़गी दिन के लम्हे काट लेता हूँ मैं तेरी याद से दिल जलाती है मगर ये शाम की नाराज़गी

Aditya
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