Kuch Alfaaz

आज इक बहती नदी को मोड़ कर के देखा है वक़्त के इस बाँध को अब तोड़ कर के देखा है जब लिखा था वो लगा था सिर्फ़ राधा कृष्ण सा बस हमारा नाम मैं ने जोड़ कर के देखा है

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