Kuch Alfaaz

आँख आँसू को ऐसे रस्ता देती है जैसे रेत गुज़रने दरिया देती है कोई भी उस को जीत नहीं पाया अब तक वैसे वो हर एक को मौक़ा देती है

Kafeel Rana
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