आँखें मूँदे रहे लब को सीते गए पेट ख़ाली रहे ग़म को पीते गए शर्म करते हैं अब ख़ुद की हस्ती पे हम ज़ुल्म सहते रहे और जीते गए
Create Imageआँखें मूँदे रहे लब को सीते गए पेट ख़ाली रहे ग़म को पीते गए शर्म करते हैं अब ख़ुद की हस्ती पे हम ज़ुल्म सहते रहे और जीते गए
Create Image