आँखों से है समझ न आना फिर होंठों से क्या समझाना सुख-दुख तो हैं सखा तुम्हारे सो इनसे अब क्या घबराना हारा-जीता क्षणिक है प्यारे गिरना उठना क्या शर्माना
Create Imageआँखों से है समझ न आना फिर होंठों से क्या समझाना सुख-दुख तो हैं सखा तुम्हारे सो इनसे अब क्या घबराना हारा-जीता क्षणिक है प्यारे गिरना उठना क्या शर्माना
Create Image