sherKuch Alfaaz
आँखों से तेरे ख़्वाब के मंज़र निकाल के हम सर्दियों में बैठे हैं चादर निकाल के जब तू ही देखने को मुयस्सर नहीं हमें आँखों को रख न दें कहीं बाहर निकाल के
Shahzan Khan Shahzan'0 Likes
आँखों से तेरे ख़्वाब के मंज़र निकाल के हम सर्दियों में बैठे हैं चादर निकाल के जब तू ही देखने को मुयस्सर नहीं हमें आँखों को रख न दें कहीं बाहर निकाल के