तू वापस लौट कर आए न आए ये दरिया हर समय बहता मिलेगा
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Shahzan Khan Shahzan'
@shahzankhanshahzan_
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
रहना पड़ता है उदासी के नगर में हम को तब कहीं जाके ये अश'आर हुआ करते हैं
sherKuch Alfaaz
आँखों से तेरे ख़्वाब के मंज़र निकाल के हम सर्दियों में बैठे हैं चादर निकाल के
sherKuch Alfaaz
ठहर गया हूँ मुहब्बत के उस क़बीले में जहाँ से मुझ को बहुत जल्द लौट जाना था
sherKuch Alfaaz
इश्क़ अधूरा मौत की नींद सुलाता है शुक्र मनाओ तुम को ज़िन्दा छोड़ दिया
sherKuch Alfaaz
अपना जो बना ले वो नज़र ढूँढ़ रहे हैं हम अपनी दु'आओं में असर ढूँढ़ रहे हैं
sherKuch Alfaaz
ज़रा सा मुस्कुराओ रौशनी हो बहुत तंग आ गए हम तीरगी से
sherKuch Alfaaz
वो चाह कर भी तो रातों को सो नहीं पाते सज़ा मिली है चराग़ों को इश्क़ करने की
sherKuch Alfaaz
उदासी चीख़ कर ये बोलती है तू आख़िर कब तलक मातम करेगा?
sherKuch Alfaaz
तुम ने तो मेरे काम सब आसान कर दिए खोने को मेरे पास में कुछ भी बचा नहीं
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