सहरा से हो के बाग़ में आया हूँ सैर को हाथों में फूल हैं मेरे पाँव में रेत है

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Tehzeeb Hafi
@tehzeeb-hafi
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
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इस लिए रौशनी में ठंडक है कुछ चराग़ों को नम किया गया है
sherKuch Alfaaz
इक तेरा हिज्र दाइमी है मुझे वर्ना हर चीज़ आरज़ी है मुझे
sherKuch Alfaaz
तमाम नाख़ुदा साहिल से दूर हो जाएँ समुंदरों से अकेले में बात करनी है
sherKuch Alfaaz
मैं जिस के साथ कई दिन गुज़ार आया हूँ वो मेरे साथ बसर रात क्यूँँ नहीं करता
sherKuch Alfaaz
मैं जंगलों की तरफ़ चल पड़ा हूँ छोड़ के घर ये क्या कि घर की उदासी भी साथ हो गई है
sherKuch Alfaaz
पेड़ मुझे हसरत से देखा करते थे मैं जंगल में पानी लाया करता था
sherKuch Alfaaz
यही एक दिन बचा था देखने को उसे बस में बैठा कर आ रहे हैं
sherKuch Alfaaz
ये एक बात समझने में रात हो गई है मैं उस से जीत गया हूँ कि मात हो गई है
sherKuch Alfaaz
मैं सुख़न में हूँ उस जगह कि जहाँ साँस लेना भी शा'इरी है मुझे
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