अजल से ले कर अब तक औरतों को सिवाए जिस्म क्या समझा गया है

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Ali Zaryoun
@ali-zaryoun
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
हम ऐसा कहने वाले जब तलक है ग़ज़ल बंदूक़ पर भारी रहेगी
sherKuch Alfaaz
अस्र के वक़्त मेरे पास न बैठ मुझ पे इक साँवली का साया है
sherKuch Alfaaz
तन्हा ही सही लड़ तो रही है वो अकेली बस थक के गिरी है अभी हारी तो नहीं है
sherKuch Alfaaz
ख़याल में भी उसे बे-रिदा नहीं किया है ये ज़ुल्म मुझ सेे नहीं हो सका नहीं किया है
sherKuch Alfaaz
मैं कुछ बता नहीं सकता वो मेरी क्या थी 'अली' कि उस को देख के बस अपनी याद आती थी
sherKuch Alfaaz
जागना और जगा के सो जाना रात को दिन बना के सो जाना
sherKuch Alfaaz
ये बद-तमीज़ अगर तुझ से डर रहे हैं तो फिर तुझे बिगाड़ के मैं ने बुरा नहीं किया है
sherKuch Alfaaz
मैं सोचता हूँ न जाने कहाँ से आ गए हैं हमारे बीच ज़माने कहाँ से आ गए हैं
sherKuch Alfaaz
आगे तो आने दीजिए रस्ता तो छोड़िए हम कौन हैं ये सामने आ कर बताएँगे
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