Kuch Alfaaz

आप हैं दोस्त तो फिर आपसे दुश्मन बेहतर राम को याद तो कर लेता था रावण अक्सर आप मज़बूर थे बिकने को बिके मंदे में हमनें बाजार की शर्तों को लगा दी ठोकर

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