Kuch Alfaaz

आप की कोई निशानी भी नहीं है कम हमारी ज़िंदगानी भी नहीं है कोई समझे काश दरिया की उदासी शांत रहता है रवानी भी नहीं है आग बढ़ती जा रही है दिल मकाँ में देखना है बस बुझानी भी नहीं है बात मैं ने माननी दिल की नहीं है अब मुझे अपनी चलानी भी नहीं है

AKASH
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