Kuch Alfaaz

आती है मुझ को अब जब कभी याद वो रात मेरी अँधेरों में खो जाती है फिर सुलाने में ख़ुद मुझ को थक हार के नींद मेरे सिरहाने पे सो जाती है

SHIV SAFAR
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