Kuch Alfaaz

आती तो है यार मगर हरदम नईं आती है बातें करना तो मुझ को भी कम नईं आती है पर छोड़ो मेरी हालत को तुम क्या समझोगे गर मैं ताश भी खेलूँ तो बेगम नईं आती है

WhatsAppXTelegram
Create Image