आती तो है यार मगर हरदम नईं आती है बातें करना तो मुझ को भी कम नईं आती है पर छोड़ो मेरी हालत को तुम क्या समझोगे गर मैं ताश भी खेलूँ तो बेगम नईं आती है
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