Kuch Alfaaz

अब ऐसे ज़ाविए पर लौ रखी जाने लगी है चराग़ों के तले भी रौशनी जाने लगी है नया पहलू सलीक़े से बयाँ करना पड़ेगा कहानी अब तवज्जोह से सुनी जाने लगी है

Khurram Afaq
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