Kuch Alfaaz

अब किसी बात से फ़र्क़ पड़ता नहीं अब मेरा दिल भी पत्थर का होने लगा कल बड़ी देर तक बात ग़म से हुई बात सुन कर मेरी ग़म भी रोने लगा

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