Kuch Alfaaz

अब मज़ीद उस सेे ये रिश्ता नहीं रक्खा जाता जिस सेे इक शख़्स का पर्दा नहीं रक्खा जाता पढ़ने जाता हूँ तो तस्में नहीं बाँधे जाते घर पलटता हूँ तो बस्ता नहीं रक्खा जाता

Tehzeeb Hafi
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