अब मेरे दर्द की और ग़म की बड़ी है यारी ज़ख़्म कितना भी हो गहरा मैं वो सह जाता हूँ जब वो कहती है 'लकी' मुझ को भुला तुम दोगे ग़ैर मुमकिन है रवानी में ये कह जाता हूँ
Create Imageअब मेरे दर्द की और ग़म की बड़ी है यारी ज़ख़्म कितना भी हो गहरा मैं वो सह जाता हूँ जब वो कहती है 'लकी' मुझ को भुला तुम दोगे ग़ैर मुमकिन है रवानी में ये कह जाता हूँ
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