Kuch Alfaaz

अब मेरी क़लम में ताक़त पुर-जहाँ आई हैं औक़ात किसी ने फिर ख़ुद अपनी दिखाई हैं इतराता हैं क्यूँँ तू उस को अपने लगा के मुँह भाई मिरे झूँठन तू ने मेरी ही खाई हैं

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