Kuch Alfaaz

अब तअल्लुक़ को तअल्लुक़ से मिलाना कैसा हो गए ख़ाक तो फिर लौट के आना कैसा तुम को मिलना ही नहीं था तो बता सकते थे बे-रुख़ी ये, ये तकल्लुफ़, ये बहाना कैसा

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