Kuch Alfaaz

अब तक समझ न पाया मैं आख़िर कि क्या थे तुम पापा मुझे बताओ तो किस का लिखा थे तुम तुम में जो बात थी वो किसी में नहीं मिली इक आदमी की शक्ल में जैसे ख़ुदा थे तुम

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