Kuch Alfaaz

अब तो सुनने को बस उस की बातें काफ़ी हैं मेरे रोने को अब बस ये रातें काफ़ी हैं हम जो मरते थे बस उस से मिलने की ख़ातिर अब मरने को दो रातें कुछ बातें काफ़ी हैं

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