Kuch Alfaaz

अब तो उस सूने माथे पर कोरेपन की चादर है अम्मा जी की सारी सजधज, सब ज़ेवर थे बाबूजी कभी बड़ा सा हाथ ख़र्च थे कभी हथेली की सूजन मेरे मन का आधा साहस, आधा डर थे बाबूजी

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