Kuch Alfaaz

अब उस के दर से भी आवाज़ आती है कि नहीं बता रे ज़िन्दगी तू बाज़ आती है कि नहीं बहकने लगता है जब जब किसी के प्यार में दिल तो तेरी याद यूँंँ आके डराती है कि नहीं

Faiz Ahmad
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