Kuch Alfaaz

अच्छा तो है बहुत पर मन से नहीं गया है भीतर गया मगर वो उतने नहीं गया है मैं ने मुनाफ़िक़ों को बाहर किया है ख़ुद ही वो शख़्स ज़िंदगी से ऐसे नहीं गया है

Aatish Alok
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