Kuch Alfaaz

अच्छी बुरी हर इक कमी के साथ हैं हम यार आँखों की नमी के साथ हैं दो जिस्म ब्याहे जा रहे हैं आज भी हम सब पराए आदमी के साथ हैं

Neeraj Neer
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