ghazalKuch Alfaaz

हम तुम्हारे ग़म से बाहर आ गए हिज्र से बचने के मंतर आ गए मैं ने तुम को अंदर आने का कहा तुम तो मेरे दिल के अंदर आ गए एक ही औरत को दुनिया मानकर इतना घुमा हूँ कि चक्कर आ गए इम्तिहान-ए-इश्क़ मुश्किल था मगर नक़्ल कर के अच्छे नंबर आ गए तेरे कुछ आशिक़ तो गंगाराम हैं और जो बाक़ी थे बिस्तर आ गए

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