ghazalKuch Alfaaz

पत्थर पहले ख़ुद को पत्थर करता है उस के बा'द ही कुछ कारीगर करता है एक ज़रा सी कश्ती ने ललकारा है अब देखें क्या ढोंग समुंदर करता है कान लगा कर मौसम की बातें सुनिए क़ुदरत का सब हाल उजागर करता है उस की बातों में रस कैसे पैदा हो बात बहुत ही सोच-समझकर करता है जिस को देखो 'दानिश' का दीवाना है क्या वो कोई जादू-मंतर करता है

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