ghazalKuch Alfaaz

तुम्हारे जाने का हम को मलाल थोड़ी है उदासियों में तुम्हारा ख़याल थोड़ी है मनाऊँ किस तरह होली मैं दोस्तों के साथ हैं सब के हाथ में ख़ंजर गुलाल थोड़ी है मुझे ये ग़म है वो अब साथ है रक़ीबों के ये आँख उस के बिछड़ने से लाल थोड़ी है सवाल ये है हवा आई किस इशारे पर चराग़ किस के बुझे ये सवाल थोड़ी है करम है उस का अगर वो नवाज़ता है हमें हमारे सज्दों का इस में कमाल थोड़ी है

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