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जगह की क़ैद नहीं थी कोई कहीं बैठे जहाँ मक़ाम हमारा था हम वहीं बैठे अमीर-ए-शहर के आने पे उठना पड़ता है लिहाज़ा अगली सफ़ों में कभी नहीं बैठे
Mehshar Afridi58 Likes
जगह की क़ैद नहीं थी कोई कहीं बैठे जहाँ मक़ाम हमारा था हम वहीं बैठे अमीर-ए-शहर के आने पे उठना पड़ता है लिहाज़ा अगली सफ़ों में कभी नहीं बैठे
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