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कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर हम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए
Farhat Abbas Shah35 Likes
कहीं से दुख तो कहीं से घुटन उठा लाए कहाँ-कहाँ से न दीवानापन उठा लाए अजीब ख़्वाब था देखा के दर-ब-दर हो कर हम अपने मुल्क से अपना वतन उठा लाए
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