nazmKuch Alfaaz

सृजन पेड़ ने अपनी दास्तान किसी पत्ते पर लिखी थोड़ी है या मिट्टी ने अपने नाम का घर बनाया है कहीं कि समुंदर ने छुपा के रखी हो भविष्य के लिए अपने अंदर कुछ नदियाँ नदियाँ जो आई अपना समय छोड़ कर आई पत्ते जो टूटे तो कहीं कोई नमी न थी शायद आसान है प्रकृति होना शायद मुश्किल है इंसान होना मुझे अपना प्रकृति होना मंज़ूर है मुझे अपना इंसान होना पसंद नहीं

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