ये कैसा तजुर्बा है कि दिल जलाने पे अक्सर अँधेरा छा जाता है रौशनी नहीं होती
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Murli Dhakad
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
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ये हमें किस ने वर्चस्व की लड़ाई दी जो है ही नहीं उसे खोते हम हैं
sherKuch Alfaaz
साक़िया तेरे इस जहाँ में क्या मिलेगा बहुत ढूँढूँगा तो ख़ुदा मिलेगा
sherKuch Alfaaz
अपने इरादों को अपनी जेब में रखा है टटोलते टटोलते आस्तीन फट गई है
sherKuch Alfaaz
सुंदर कोयल सुंदर कागा सुंदर मृग के नैन भागे 'रिंद' दौड़ता जाए दिवस दिखे ना रैन
sherKuch Alfaaz
मेरी उँगलियों में पड़ गई है गिरहें तेरे गेसुओं की आजकल किसी भी बात पर अकड़ जाती है
sherKuch Alfaaz
जाम कहने सुनने को कहानी रह गया है और पीने को बस पानी रह गया है
sherKuch Alfaaz
मेरे नशेमन में किसी तरह का अँधेरा नहीं है उस ख़्वाब में न जी पाऊँगा जो मेरा नहीं है
sherKuch Alfaaz
किधर जा रहा है जुगनू शाम उठाए इधर बैठा हूँ मैं जाम उठाए
sherKuch Alfaaz
जीना कहते हैं जिसे है तमाशा करना जैसे नशे में हो फिर से नशा करना
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