nazmKuch Alfaaz

ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना पत्थर को गुहर दीवार को दर कर्गस को हुमा क्या लिखना इक हश्र बपा है घर में दम घुटता है गुम्बद-ए-बे-दर में इक शख़्स के हाथों मुद्दत से रुस्वा है वतन दुनिया-भर में ऐ दीदा-वरो इस ज़िल्लत को क़िस्मत का लिखा क्या लिखना ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना ये अहल-ए-हश्म ये दारा-ओ-जम सब नक़्श बर-आब हैं ऐ हमदम मिट जाएँगे सब पर्वर्दा-ए-शब ऐ अहल-ए-वफ़ा रह जाएँगे हम हो जाँ का ज़ियाँ पर क़ातिल को मासूम-अदा क्या लिखना ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना लोगों पे ही हम ने जाँ वारी की हम ने ही उन्हीं की ग़म-ख़्वारी होते हैं तो हों ये हाथ क़लम शाएर न बनेंगे दरबारी इब्लीस-नुमा इंसानों की ऐ दोस्त सना क्या लिखना ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना हक़ बात पे कोड़े और ज़िंदाँ बातिल के शिकंजे में है ये जाँ इंसाँ हैं कि सह में बैठे हैं खूँ-ख़्वार दरिंदे हैं रक़्साँ इस ज़ुल्म-ओ-सितम को लुत्फ़-ओ-करम इस दुख को दवा क्या लिखना ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना हर शाम यहाँ शाम-ए-वीराँ आसेब-ज़दा रस्ते गलियाँ जिस शहर की धुन में निकले थे वो शहर दिल-ए-बर्बाद कहाँ सहरा को चमन बन कर गुलशन बादल को रिदा क्या लिखना ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना ऐ मेरे वतन के फ़नकारो ज़ुल्मत पे न अपना फ़न वारो ये महल-सराओं के बासी क़ातिल हैं सभी अपने यारो विर्से में हमें ये ग़म है मिला इस ग़म को नया क्या लिखना ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना

Similar Moods

View All ›

More moods that pair well with Habib Jalib's nazm.

Similar Writers

View All ›

Our suggestions based on Habib Jalib.