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लाख कहते रहें ज़ुल्मत को न ज़ुल्मत लिखना हम ने सीखा नहीं प्यारे ब-इजाज़त लिखना
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@habib-jalib
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लाख कहते रहें ज़ुल्मत को न ज़ुल्मत लिखना हम ने सीखा नहीं प्यारे ब-इजाज़त लिखना
वो देखने मुझे आना तो चाहता होगा मगर ज़माने की बातों से डर गया होगा
पा सकेंगे न उम्र भर जिस को जुस्तुजू आज भी उसी की है
दुनिया तो चाहती है यूँँही फ़ासले रहें दुनिया के मश्वरों पे न जा उस गली में चल
कुछ लोग ख़यालों से चले जाएँ तो सोएँ बीते हुए दिन रात न याद आएँ तो सोएँ
एक हमें आवारा कहना कोई बड़ा इल्ज़ाम नहीं दुनिया वाले दिल वालों को और बहुत कुछ कहते हैं
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