ज़िंदगी भी आख़िरश तंहाई है मैं भला तन्हाई से क्यूँ डर गया
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Ajeetendra Aazi Tamaam
@aazitamaam
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
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तुम्हारे शहर में आ कर ठिकाना ढूँढ़ते हैं हम अपने शहर में होते तो घर गए होते
sherKuch Alfaaz
तन्हाई में अक्सर हद से गुजरती है जीने नहीं देती यादों की पुरवाई
sherKuch Alfaaz
तमाम उम्र हमें साथ साथ चलना है बस इतना कह के सफ़र कर लिया जुदा उस ने
sherKuch Alfaaz
सौ ज़ख़्म दिल पे हैं मेरे सौ ज़ख़्म मेरी जाँ क्या एक-एक दिल मेरा दिखलाए आप को
sherKuch Alfaaz
न जाने किस गली में रूठ जाए ज़िंदगी हम सेे न जाने किस गली में ज़िंदगी की शाम हो जाए
sherKuch Alfaaz
मिरी जाँ बेबसी क्या दर्द क्या है ये उन सेे पूछना जो बे-ज़बाँ हैं
sherKuch Alfaaz
मैं कहता था मगर तू ने न मानी पर अब तेरा भी दिल भर ही गया ना
sherKuch Alfaaz
किसी को रौशनी देने की ख़ातिर चराग़ इक उम्र भर जलता रहा है
sherKuch Alfaaz
कहते हैं सामिईन उसे जाम-ए-जम-ए-हुस्न वो जाम बिन पिए ही जो बहकाए आप को
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