मुझ को उस की आँखों में कूदने की आदत है मैं तुम्हें बताऊँगा ख़ुद-कुशी के बारे में

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Abbas Tabish
@abbas-tabish
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
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मैं तो ऐ इश्क़ तेरी कूज़ा-गरी जानता हूँ तू ने हम दो को मिलाया तो बना एक ही शख़्स
sherKuch Alfaaz
क्या तमाशा है कि सब मुझ को बुरा कहते हैं और सब चाहते हैं मेरी तरह का होना
sherKuch Alfaaz
मेरे आँसू मिरे अंदर ही गिरे रोने से जी और बोझल हो गया
sherKuch Alfaaz
मैं अपने आप में गहरा उतर गया शायद मिरे सफ़र से अलग हो गई रवानी मिरी
sherKuch Alfaaz
मैं ने आँखों के किनारे भी न तर होने दिए जिस तरफ़ से आया था सैलाब वापस कर दिया
sherKuch Alfaaz
शायद किसी बला का था साया दरख़्त पर चिड़ियों ने रात शोर मचाया दरख़्त पर
sherKuch Alfaaz
कोई अंदर की घुटन का भी इलाज गालियाँ काग़ज़ पे लिख कर फेंक दे
sherKuch Alfaaz
सुनहरी लड़कियों इनको मिलो मिलो न मिलो ग़रीब होते हैं बस ख़्वाब देखने के लिए
sherKuch Alfaaz
यार इक बार परिंदों को हुकूमत दे दो ये किसी शहर को मक़्तल नहीं होने देंगे
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