ज़रा सी अपनी बात नहीं मिलने पे तुम यूँँ रूठे हो जैसे उलफ़त थी ही नहीं
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Ambar
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
ये मत सोचो केवल मैं हूँ इस दुनिया में सब ही दुखी हैं
sherKuch Alfaaz
उस के लिए तुम हम से भी लड़ जाते हो और कहते हो वो मेरा कुछ लगता नहीं
sherKuch Alfaaz
उसे मुझ को अपना बनाने की ख़ातिर ज़मीं आसमाँ एक करना पड़ेगा
sherKuch Alfaaz
उन सेे जा के कर न लेना दोस्ती इक हादसा है मत करो तुम कहना मानो दिल-लगी इक हादसा है
sherKuch Alfaaz
तुम्हें खोने का डर कुछ इस तरह सीने में कहता है चले जाओगे जिस दिन तुम धड़कना छोड़ दूँगा मैं
sherKuch Alfaaz
तुम्हीं से दिल-लगी है आशिक़ी है ज़िंदगी भी है मगर फिर भी तुम्हें पाना फ़क़त इक ख़्वाब जैसा है
sherKuch Alfaaz
तुम्हें है क्या लेना देना अंबर पागल है तो है
sherKuch Alfaaz
तुम्हें चाहिए थी बदन की महक हमारे लिए प्यार कुछ और है
sherKuch Alfaaz
तुम्हें बस देख ही सकते हैं हम हमारी हैसियत जो है सो है
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