मेरे पड़ोस में ऐसे भी लोग बसते हैं जो मुझ में ढूँड रहे हैं बुराइयाँ अपनी

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Ameer Qazalbash
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
तुम राह में चुप-चाप खड़े हो तो गए हो किस किस को बताओगे कि घर क्यूँँ नहीं जाते
sherKuch Alfaaz
इक परिंदा अभी उड़ान में है तीर हर शख़्स की कमान में है
sherKuch Alfaaz
महसूस कर रहा था उसे अपने आस पास अपना ख़याल ख़ुद ही बदलना पड़ा मुझे
sherKuch Alfaaz
आज की रात भी गुज़री है मिरी कल की तरह हाथ आए न सितारे तिरे आँचल की तरह
sherKuch Alfaaz
उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़ हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा
sherKuch Alfaaz
यकुम जनवरी है नया साल है दिसम्बर में पूछूँगा क्या हाल है
sherKuch Alfaaz
लोग जिस हाल में मरने की दुआ करते हैं मैं ने उस हाल में जीने की क़सम खाई है
sherKuch Alfaaz
उसी का शहर वही मुद्दई वही मुंसिफ़ हमें यक़ीं था हमारा क़ुसूर निकलेगा
sherKuch Alfaaz
मेरे जुनूँ का नतीजा ज़रूर निकलेगा इसी सियाह समुंदर से नूर निकलेगा
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