ये वजूद-ए-इश्क़ तुझ को रब मिटाना ही पड़ेगा हुस्न के हाथों वफ़ा होता है रुस्वा देख हर पल

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A R Sahil "Aleeg"
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sherKuch Alfaaz
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ये पहेली अज़ल से उलझी है है बुरा हुस्न या है इश्क़ बुरा
sherKuch Alfaaz
ये इश्क़ भी तो है रोलेट ऐक्ट सा जिस में
sherKuch Alfaaz
वो गिरफ़्तार जो करे तो फिर गेसुओं के क़फ़स में मर जाए
sherKuch Alfaaz
वगरना इश्क़ से मैं तो किया करता था नफ़रत कहानी में ज़बरदस्ती मुझे डाला गया है
sherKuch Alfaaz
उस के झूठे इश्क़ को कर लेता मैं तस्लीम लेकिन उस का लहजा और इरादा बे-वफ़ाई से भरा था
sherKuch Alfaaz
उस को होता है हर इक रोज़ नए शख़्स से इश्क़ उस के इस शौक़ पे अब ख़ाक है हैराँ होना
sherKuch Alfaaz
उम्र सारी लगा दो नाप न पाओगे कभी है जो ये इश्क़ मेरा ला-मुतनाही ठहरा
sherKuch Alfaaz
उम्र सारी इश्क़ में दी काट अपनी इस लिए कुछ कर न पाया ज़िंदगी में
sherKuch Alfaaz
ठीक है साहिल को साहिल भी बनाया आपने बे-वफ़ाई भी तो की हो ये भी सच है मान लो
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