वो इंतिक़ाम की आतिश थी मेरे सीने में मिला न कोई तो ख़ुद को पछाड़ आया हूँ
Writer
Jamal Ehsani
@jamal-ehsani
2
1
Sher
1
Ghazal
0
Nazm
80 views
sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
न वो हसीन न मैं ख़ूब-रू मगर इक साथ हमें जो देख ले वो देखता ही रह जाए
sherKuch Alfaaz
आँखों से अब वो ख़्वाब को निस्बत नहीं रही इक उम्र हो गई ये समुंदर ख़राब है
sherKuch Alfaaz
आगाह मैं चराग़ जलाते ही हो गया दुनिया मिरे हिसाब से बढ़ कर ख़राब है
sherKuch Alfaaz
उस की नज़र बदलने से पहले की बात है मैं आसमान पर था सितारा ज़मीन पर
sherKuch Alfaaz
उस ने बारिश में भी खिड़की खोल के देखा नहीं भीगने वालों को कल क्या क्या परेशानी हुई
sherKuch Alfaaz
ख़ुद जिसे मेहनत मशक़्क़त से बनाता हूँ 'जमाल' छोड़ देता हूँ वो रस्ता आम हो जाने के बा'द
sherKuch Alfaaz
ये ग़म नहीं है कि हम दोनों एक हो न सके ये रंज है कि कोई दरमियान में भी न था
sherKuch Alfaaz
रात सोने के लिए दिन काम करने के लिए वक़्त मिलता ही नहीं आराम करने के लिए
sherKuch Alfaaz
याद रखना ही मोहब्बत में नहीं है सब कुछ भूल जाना भी बड़ी बात हुआ करती है
Similar Writers
Our suggestions based on Jamal Ehsani.







