उस की फ़ितरत में न था तर्क-ए-त'अल्लुक़ लेकिन दूसरे शख़्स को इस नहज पे पहुँचा देना

Writer
Jawwad Sheikh
@jawwad-sheikh
28
15
Sher
13
Ghazal
0
Nazm
1,548 views
sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
किसी के सर्द रवय्ये पे ख़ामुशी का लिहाफ़ ये इंतिक़ाम भी क्या इंतिक़ाम होता है
sherKuch Alfaaz
मैं ऐसी उम्र से दुख झेलने लगा 'जव्वाद' जो आम तौर पे होती है खेलने वाली
sherKuch Alfaaz
लग रहा है ये नर्म लहजे से फिर तुझे कोई मसअला हुआ है
sherKuch Alfaaz
ख़ुद को मसरूफ़ किए रखने की कोशिश करना क्या तेरी याद के ज़ुमरे में नहीं आता है
sherKuch Alfaaz
तुम अगर सीखना चाहो मुझे बतला देना आम सा फ़न तो कोई है नहीं तोहफ़ा देना
sherKuch Alfaaz
सब को बचाओ ख़ुद भी बचो फ़ासला रखो अब और कुछ करो न करो फ़ासला रखो
sherKuch Alfaaz
टूटने पर कोई आए तो फिर ऐसा टूटे कि जिसे देख के हर देखने वाला टूटे
sherKuch Alfaaz
मैं चाहता हूँ मोहब्बत मुझे फ़ना कर दे फ़ना भी ऐसा कि जिस की कोई मिसाल न हो
sherKuch Alfaaz
मैं इस ख़याल से जाते हुए उसे न मिला कि रोक लें न कहीं सामने खड़े आँसू
Similar Writers
Our suggestions based on Jawwad Sheikh.







