यही है ज़िंदगी तो ज़िंदगी से ख़ुद-कुशी अच्छी कि इंसाँ आलम-ए-इंसानियत पर बार हो जाए
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Jigar Moradabadi
@jigar-moradabadi
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sherKuch Alfaaz
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जो उन पे गुज़रती है किस ने उसे जाना है अपनी ही मुसीबत है अपना ही फ़साना है
sherKuch Alfaaz
कूचा-ए-इश्क़ में निकल आया जिस को ख़ाना-ख़राब होना था
sherKuch Alfaaz
जहल-ए-ख़िरद ने दिन ये दिखाए घट गए इंसाँ बढ़ गए साए
sherKuch Alfaaz
या वो थे ख़फ़ा हम से या हम हैं ख़फ़ा उन से कल उन का ज़माना था आज अपना ज़माना है
sherKuch Alfaaz
जो तूफ़ानों में पलते जा रहे हैं वही दुनिया बदलते जा रहे हैं
sherKuch Alfaaz
तिरे जमाल की तस्वीर खींच दूँ लेकिन ज़बाँ में आँख नहीं आँख में ज़बान नहीं
sherKuch Alfaaz
सदाक़त हो तो दिल सीनों से खिंचने लगते हैं वाइज़ हक़ीक़त ख़ुद को मनवा लेती है मानी नहीं जाती
sherKuch Alfaaz
हमीं जब न होंगे तो क्या रंग-ए-महफ़िल किसे देख कर आप शरमाइएगा
sherKuch Alfaaz
दोनों हाथों से लूटती है हमें कितनी ज़ालिम है तेरी अँगड़ाई
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