वो बात ज़रा सी जिसे कहते हैं ग़म-ए-दिल समझाने में इक उम्र गुज़र जाए है प्यारे
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Kaleem Aajiz
@kaleem-aajiz
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
न जाने रूठ के बैठा है दिल का चैन कहाँ मिले तो उस को हमारा कोई सलाम कहे
sherKuch Alfaaz
वो कहते हैं हर चोट पर मुस्कुराओ वफ़ा याद रक्खो सितम भूल जाओ
sherKuch Alfaaz
सुना है हमें बे-वफ़ा तुम कहो हो ज़रा हम से आँखें मिला लो तो जानें
sherKuch Alfaaz
दामन पे कोई छींट न ख़ंजर पे कोई दाग़ तुम क़त्ल करो हो कि करामात करो हो
sherKuch Alfaaz
तल्ख़ियाँ इस में बहुत कुछ हैं मज़ा कुछ भी नहीं ज़िंदगी दर्द-ए-मोहब्बत के सिवा कुछ भी नहीं
sherKuch Alfaaz
ग़म है तो कोई लुत्फ़ नहीं बिस्तर-ए-गुल पर जी ख़ुश है तो काँटों पे भी आराम बहुत है
sherKuch Alfaaz
ज़ालिम था वो और ज़ुल्म की आदत भी बहुत थी मजबूर थे हम उस से मोहब्बत भी बहुत थी
sherKuch Alfaaz
दर्द ऐसा है कि जी चाहे है ज़िंदा रहिए ज़िंदगी ऐसी कि मर जाने को जी चाहे है
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