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ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है हम तो इस जीने के हाथों मर चले

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@khwaja-meer-dard
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ज़िंदगी है या कोई तूफ़ान है हम तो इस जीने के हाथों मर चले
बाजी बदी थी उस ने मेरे चश्म-ए-तर के साथ आख़िर को हार हार के बरसात रह गई
तर-दामनी पे शैख़ हमारी न जाइयो दामन निचोड़ दें तो फ़रिश्ते वज़ू करें
मैं जाता हूँ दिल को तिरे पास छोड़े मिरी याद तुझ को दिलाता रहेगा
सैर कर दुनिया की ग़ाफ़िल ज़िंदगानी फिर कहाँ ज़िंदगी गर कुछ रही तो ये जवानी फिर कहाँ
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