जिस्म चादर सा बिछ गया होगा रूह सिलवट हटा रही होगी

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Kumar Vishwas
@kumar-vishwas
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Sher
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Ghazal
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Nazm
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sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
चारों तरफ़ बिखर गईं साँसों की ख़ुशबुएँ राह-ए-वफ़ा में आप जहाँ भी जिधर गए
sherKuch Alfaaz
रात के जिस्म में जब पहला पियाला उतरा दूर दरिया में मेरे चाँद का हाला उतरा
sherKuch Alfaaz
दिल के तमाम ज़ख़्म तेरी हाँ से भर गए जितने कठिन थे रास्ते वो सब गुज़र गए
sherKuch Alfaaz
मेरा ख़याल तेरी चुप्पियों को आता है तेरा ख़याल मेरी हिचकियों को आता है
sherKuch Alfaaz
हम कहाँ हैं ये पता लो तुम भी बात आधी तो सँभालो तुम भी
sherKuch Alfaaz
उसी की तरह मुझे सारा ज़माना चाहे वो मिरा होने से ज़्यादा मुझे पाना चाहे
sherKuch Alfaaz
कोई दीवाना कहता है कोई पागल समझता है मगर धरती की बेचैनी को बस बादल समझता है
sherKuch Alfaaz
बचपना ऐ लड़को तुम सेे कभी छूटता ही नहीं जवान होना तो बस लड़कियों को आता है
sherKuch Alfaaz
सखियों संग रँगने की धमकी सुन कर क्या डर जाऊँगा तेरी गली में क्या होगा ये मालूम है पर आऊँगा
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