सब कहाँ कुछ लाला-ओ-गुल में नुमायाँ हो गईं ख़ाक में क्या सूरतें होंगी कि पिन्हाँ हो गईं
Writer
Mirza Ghalib
@mirza-ghalib
54
21
Sher
33
Ghazal
0
Nazm
2,499 views
sherKuch Alfaaz
sherKuch Alfaaz
कोई वीरानी सी वीरानी है दश्त को देख के घर याद आया
sherKuch Alfaaz
बेदाद-ए-इश्क़ से नहीं डरता मगर 'असद' जिस दिल पे नाज़ था मुझे वो दिल नहीं रहा
sherKuch Alfaaz
की मेरे क़त्ल के बा'द उस ने जफ़ा से तौबा हाए उस ज़ूद-पशीमाँ का पशीमाँ होना
sherKuch Alfaaz
न सताइश की तमन्ना न सिले की परवा गर नहीं हैं मिरे अश'आर में मअ'नी न सही
sherKuch Alfaaz
रहिए अब ऐसी जगह चल कर जहाँ कोई न हो हम-सुख़न कोई न हो और हम-ज़बाँ कोई न हो
sherKuch Alfaaz
तेशे बग़ैर मर न सका कोहकन 'असद' सरगश्ता-ए-ख़ुमार-ए-रुसूम-ओ-क़ुयूद था
sherKuch Alfaaz
अपनी गली में मुझ को न कर दफ़्न बाद-ए-क़त्ल मेरे पते से ख़ल्क़ को क्यूँँ तेरा घर मिले
sherKuch Alfaaz
ग़म अगरचे जाँ-गुसिल है प कहाँ बचें कि दिल है ग़म-ए-इश्क़ गर न होता ग़म-ए-रोज़गार होता
sherKuch Alfaaz
बुलबुल के कारोबार पे हैं ख़ंदा-हा-ए-गुल कहते हैं जिस को इश्क़ ख़लल है दिमाग़ का
Similar Writers
Our suggestions based on Mirza Ghalib.







