मुझे तो क़ैद-ए-मोहब्बत अज़ीज़ थी लेकिन किसी ने मुझ को गिरफ़्तार कर के छोड़ दिया
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Shakeel Badayuni
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sherKuch Alfaaz
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बे-क़रार कर के हमें यूँँ न जाइए आप को हमारी क़सम लौट आइए
sherKuch Alfaaz
वो हम से ख़फ़ा हैं हम उन से ख़फ़ा हैं मगर बात करने को जी चाहता है
sherKuch Alfaaz
क़ैद से छूट के भी क्या पाया आज भी पाँव में ज़ंजीर तो है
sherKuch Alfaaz
अब तो ख़ुशी का ग़म है न ग़म की ख़ुशी मुझे बे-हिस बना चुकी है बहुत ज़िंदगी मुझे
sherKuch Alfaaz
अपनी हस्ती का भी इंसान को इरफ़ाँ न हुआ ख़ाक फिर ख़ाक थी औक़ात से आगे न बढ़ी
sherKuch Alfaaz
तिरे बग़ैर अजब बज़्म-ए-दिल का आलम है चराग़ सैंकड़ों जलते हैं रौशनी कम है
sherKuch Alfaaz
बदलती जा रही है दिल की दुनिया नए दस्तूर होते जा रहे हैं
sherKuch Alfaaz
लम्हे उदास उदास फ़ज़ाएं घुटी घुटी दुनिया अगर यही है तो दुनिया से बच के चल
sherKuch Alfaaz
कभी यक-ब-यक तवज्जोह कभी दफ़अ'तन तग़ाफ़ुल मुझे आज़मा रहा है कोई रुख़ बदल बदल कर
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